शंखनाद की गूंज कानों में पड़ते ही ऐसा लगता है, जैसे चारों तरफ माहौल भक्तिमय हो जाता है। सफेद रंग के शंख से निकली ध्वनि मानो प्रकृति हर कोने में गूंज-गूंज कर यह संदेश देती है कि किसी भी प्रकार की नकारात्नक ऊर्जा तब तक बलवान नहीं हो सकती है जब तक ब्रह्मांड में शंखनाद का अस्तित्व है।

 

 

शंख समुद्र मंथन से मिले चौदह रत्नों में से एक है, जिसकी उत्पत्ति छठें स्थान पर हुई थी। हिंदू धर्म में कोई भी पूजा शंख-ध्वनि के बिना अधूरी मानी जाती है। शंख को माता लक्ष्मी जी का भाई माना जाता है क्योकि मां लक्ष्मी के समान शंख का जन्म भी सागर की गोद से हुआ है। माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु दोनों ही अपने हाथों में शंख धारण करते हैं। दक्षिणावर्ती शंख के अद्भुत गुणों के कारण ही भगवान विष्णु ने उसे अपने हस्तकमल में धारण किया हुआ है।


 शंख को घर में किसी भी दिन लाकर पूजा स्थल में स्थापित किया जा सकता है। लेकिन होली, दीपावली, जनमाष्टमी का दिन अति शुभ माना गया है। घर में शंख रखने से सुख-स्मृद्धि का वास होता है, क्योंकि हमारे धर्म-ग्रंथ में कहा गया है कि सृष्टी आत्मा से, आत्मा आकाश से, आकाश वायु से, वायु आग से, आग जल से और जल पृथ्वी से उत्पन्न हुआ है और इन सभी तत्वों से मिलकर शंख का जन्म हुआ है।



 शास्त्रों में शंख को महाऔषधि माना गया है, क्योंकि शंख में मौजूद प्राकृतिक फास्फोरस और कैल्शियम जैसे तत्तव कीटाणुओ को नष्ट करने की अद्भूत क्षमता रखते है।  शंख में भरकर रखे गये जल से पूजन सामग्री धोने और घर के आस-पास छिड़कने से वातावरण शुद्ध रहता है



 प्रतिदिन शंखनाद करने वाले व्यक्ति को खांसी, दमा, पीलिया, ब्लडप्रेशर या दिल से संबंधित मामूली से लेकर गंभीर बीमारियां कोसों दूर रहतीहै। शंख से मुख के तमाम रोगों का नाश होता है। शंख बजाने से चेहरे, श्वसन तंत्र, श्रवण तंत्र तथा फेफड़ों का व्यायाम होता है। शंख वादन से स्मरण शक्ति बढ़ती है।



 विश्व का सबसे बड़ा शंख केरल राज्य के गुरुवयूर के श्रीकृष्ण मंदिर में सुशोभित है,  जिसकी लंबाई लगभग आधा मीटर और वजन दो किलोग्राम है। सफेद रंग के शंख को सबसे अधिक शुभ माना जाता है। आमतौर पर शंख लाल, पीला और काले वर्ण में भी पाया जाता है।


 

शंख को भले ही बहुत ही पवित्र और रत्नों के समान माना गया हो, लेकिन शिव जी की अराधना में इसे वर्जित माना गया है क्योंकि शंखनाद की ध्वनि से सभी प्रकार की नकारात्मक और भूत-प्रेत भाग जाते है। जबकि शिवजी देवताओं की भांति भूतों के भी आराध्य माने गये है।


 

ऐसे शंख को कभी भी घर में न रखें जो कहीं से भी टूटा फूटा हो, चटका हो या उसमें दरार हो।  यदि उसके किनारे कहीं से भी चटके हों, तो उन्हें रेतकर ठीक कर लें अन्यथा उसे नदी या तालाब में प्रवाहित कर दें। अगर शंख बजाते समय हाथ से छूटकर गिर गया हो, तो भी उसे पूजा में उपयोग ना करें क्योंकि इन्हें खंडित माना जाता है।