आपने अक्सर लोगों को ये कहते सुना होगा की औरतें तो बेवकूफ होंती हैं। क्यों कि वो हमेंशा ही कन्फयूज रहतीं हैं, कहतीं कुछ हैं और करती कुछ हैं। बाजार लेने कुछ जातीं है और लेके कुछ आ जातीं है। बस बातें बनाना जानती हैं और कुछ नहीं। इसीलिए लोग हमेशा कहते रहतें है कि औरतें बेवकुफ होतीं हैं। आज मैं आपको ऐसी ही एक बेवकूफ औरत से परिचय कराने जा रही हुँ।

एक औरत अपने हस-बैंड के साथ कुछ शापिंग करने निकली। और वहाँ जाकर कन्फयूज हो के रह गई। अरे अरे आप कहीं ये तो नहीं सोच रहे हैं कि वो औरत किसी काॅस्मेटिक के दुकान पर नेलपॅालिश की शेड मिलाने या मैचिंग इयर रिंग लेने में कन्फयूज हो गई। अगर आप ऐसा सोच रहे हैं तो बिल्कुल गलत सोच रहे हैं। अरे वो औरत तो सब्जी के दुकान पर जा के प्याज, आलू और टमाटर के बीच में कन्फयूज हो कर रह गई। और जोर जोर से कहने लगी की हाय दईया अब मैं कहाँ जाऊँ और किसके पास जाऊँ तब ही झट से उसके पतिदेव उप्सस... हस-बैंड ने कहा श्रीमती जी आज आप की परीक्षा की घड़ी है, सोच-समझकर कदम बढ़ाना और अपना वोट निशाने पर ही लगाना। अब आप सोच रहे होंगें की सब्जी मंडी में वोट...? दरसल में वहाँ सब्जी, सब्जी वाले नहीं बल्कि कुछ नेताओं ने लगा रखी थी और जोर-जोर से चिल्ला रहे थे कि ‘‘एक वोट देदो और 1 किलो के दाम में 10 किलो सब्जी लेलो’’ अब समस्या ये थी की हर नेता की दुकान में पूरी की पूरी सब्जियाँ उप्लब्ध ही नही थीं, किसी के पास कुछ - तो किसी के पास कुछ थीं। जिसमें से आलू ,प्याज तो एक नेता जी और टमाटर की दुकान दूसरे नेता ने लगा रखीं थी। अब टमाटर के बिना सब्जी स्वादिश्ट भी तो नहीं लगती है, और प्याज के बिना तड़का मस्त नही लगता है और औरतों को बच्चों का ख्याल रखते हुए सब्जी में आलू डालना भी जरूरी होता है। इतने में वो बेवकूफ औरत अपने हस-बैंड को कुहनी मारते हुए बोली जरा आओ मेरे साथ और झट से एक नेता जी के पास पहुँच गई... जो कह रहे थे ‘‘एक वोट देदो और 1 किलो के दाम में 10 किलो सब्जी लेलो’’ और फिर वो बेवकूफ औरत जोर जोर से चिल्लाने लगी हाय हाय मैं तो लुट गई बरबाद हो बई अब मै क्या कंरू। हम औरतों का तो घर से निकलना ही दुश्वार हो गया है। बस बगल में मेरा घर है वहाँ से यहाँ तक आने में बदमाशों ने मेरा पर्स ही छीन लिया और तो और बन्दूक भी दिखा गए। हस-बैंड आश्चर्य से अपनी श्रीमती जी की तरफ देखा और बोला ... बगल में घर, पर्स चोरी ये सब कब हुआ मुझको तो पता भी नहीं चला उस बेवकूफ औरत ने हस-बैंड को कुहनी मारी बोली चुप रहो तुम..., अरे हाय हाय क्या होगा हमारी सुरक्षा का, कोई तो मद्द करो....। इतना सुनते ही आलू प्याज वाले नेता जी पास आए और बोले क्या हुआ बहन जी क्यों परेशान हैं आप...? क्या मैं आप की कोई मद्द कर सकता हुँ। बेवकूफ़ औरत झट से नेता जी की तरफ मुडी़ और सवाल पे सवाल कर डाले उनसे... क्या होगा हमारी सुरक्षा का, हम कैसे सुरक्षित रहेंगें, जब हम औरतें सुरक्षित नहीं हैं तो हमारी लड़कियॉ कैसे सुरक्षित रहेगीं, नेता जी घबराते हुए बोले बहन जी मैं आपकी क्या मद्द कंरू... तब क्या तथा बेवकूफ औरत थोड़ा सा नखरे दिखाते हुए बोली...नेता जी आपके राज्य में सुरक्षा ही नहीं है, अब देखो ना नेता जी मैं तो यहाँ पूरे हफ्ते की सब्जी खरीदने आयी थी पर बदमाशों ने मेरा पर्स ही छींन लिया अब सब्जी खरीदूँ कैसे फिर क्या था नेता जी ने सुरक्षा के वादे के साथ-साथ 10 किलो के बजाय 20 किलो आलू - प्याज उस बेवकूफ़ औरत को दे दिए वो भी कुछ बोनस सब्जियों के साथ। बेवकूफ़ औरत अभी तीखी मुस्कुराहट के साथ नेता जी को धन्यवाद बोल ही रही थी कि सारा तमाशा देख रहे टमाटर वाले नेता जी भी वहाँ आ धमके और बोले मैडम जी प्याज और आलू..., टमाटर के बिना स्वादिश्ट नहीं लगेंगे इसलिए मेरी तरफ से ये 4-5 पेटी टमाटर भी रख लीजिए, फिर क्या था नेता जी ने टमाटर के साथ-साथ सुरक्षा के तौर पर बेवकूफ औरत को उसके घर तक छुड़वानें का प्रबंध भी कर दिया। बेवकूफ़ औरत खुशी से फूली नहीं समा रही थी पर अपनी हँसी को दबाते हूए गाड़ी का शीशा नीचे किया और बोली नेता जी अभी भी मुझे मेरे पर्स का दुख सता रहा है इसलिए मेरी तबियत थोड़ी खराब हो रही है अगर मैं वोट डालने ना आ पाऊँ तो कृपया बुरा ना मनना । वैसे मुझे अभी झाड़ू भी लेना था। पैसे नहीं हैं अब तो....